दतिया : CDS विपिन रावत ने 3 महीने पहले पीतांबरा माई के दर्शन कर विशेष अनुष्ठान में लिया भाग


 Satyakam News | 08/12/2021 8:49 PM


दतिया। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का तीन महीने पहले ग्वालियर आना भी हुआ है। वैसे तो उनका ग्वालियर में रुकने का कार्यक्रम नहीं था। यहां से विमान बदलकर दतिया पीतांबरा माई के दर्शन कर विशेष अनुष्ठान में भाग लेना था, लेकिन एक इत्तेफाक (खराब मौसम) के कारण कई घंटे उन्हें ग्वालियर एयरबेस पर ही गुजारने पड़े। इस दौरान की यादें यहां सेना के अफसरों के पास है। CDS बिपिन रावत ने यहां अफसरों से चर्चा की थी।

चर्चा में वह एक सैनिक के हौसले पर बात करते रहे। साथ ही, बॉर्डर से लेकर अंदर सेना के बेस कैंप तक के हालातों पर बात की थी। इसके बाद 14 सितंबर को वह सुबह साढ़े सात बजे दतिया पहुंचे। यहां 7 घंटे तक उन्होंने विशेष अनुष्ठान किया। बुधवार दोपहर कुन्नूर में CDS बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया है। इसमें CDS, उनकी पत्नी मधुलिका समेत 14 लोग सवार थे। इसमें सभी की मौत हो गई है।

देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल विपिन रावत का ग्वालियर में एक मात्र दौरा तीन महीने पहले हुआ था। 13 सितंबर की दोपहर वह सेना के विशेष विमान से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंचे थे। यहां से उनको विमान बदलकर झांसी जाना था। वहां से लौटकर 14 सितंबर को उन्हें दतिया में पीतांबरा पीठ के दर्शन कर विशेष पूजा अर्चना करनी थी। अचानक मौसम खराब होने के कारण विमान नहीं उड़ सकता था। जिस कारण उन्होंने काफी समय ग्वालियर एयरबेस पर ही गुजारा था। साथ में उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी थीं। इसके बाद उन्होंने सेना के अफसरों के साथ मुलाकात की और यहां उनका हौसला भी बढ़ाया।

14 सितंबर को सुबह साढ़े सात बजे जनरल बिपिन रावत, पत्नी मधुलिका रावत के साथ दतिया पीतांबरा पीठ पहुंचे थे। यहां वह करीब 7 घंटे तक रहे थे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी को भी मंदिर परिसर में जाने की इजाजत नहीं थी। पूरी व्यवस्था फौज ने अपने हाथों में ले रखी है। पहले से ही चयनित पुजारियों के दल ने उनको पूजा पाठ कराया है। यहां उन्होंने नवचंडी यज्ञ में भाग लिया था। इसके बाद दोपहर करीब 2.30 बजे वह ग्वालियर पहुंचे और यहां से सेना के विशेष विमान से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

जनरल रावत ने 13 सितंबर को ग्वालियर से मौसम साफ होने के बाद झांसी स्थित सैनिक छावनी पहुंचकर वहां व्हाइट टाइगर डिवीजन का निरीक्षण करने के साथ ही सैनिकों की दक्षता को परखा। यहां उन्होंने सेना के आला अफसरों के साथ तात्कालीक घटनाक्रम पर चर्चा की।

कहने को तो बहुत कम समय के लिए CDS बिपिन रावत यहां ठहरे थे, लेकिन इतने कम समय में भी वह अपनी शख्सियत की छाप अफसरों पर छोड़ गए थे। हर मसले पर उनकी टिप्पणी और अंदाज के बयां ने अफसरों को उनका कायल कर दिया था। सेना के कुछ अफसरों से बात करने पर पता लगा था कि जनरल ने हर किसी से अलग अंदाज में मुलाकात की थी।

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