फिलीपींस की मारिया रेसा और रूस के दिमित्री मुरातोव को शांति को मिला नोबेल


 Satyakam News | 08/10/2021 9:30 PM


वॉशिंगटन। फिलीपींस की मारिया रेसा और रूस के दिमित्री मुरातोव को इस साल का शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। फिलिपींस की मारिया और रूस के दिमित्री पेशे से पत्रकार हैं। नोबेल कमेटी की अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने पुरस्कारों का ऐलान किया है।

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए किए गए प्रयासों को देखते हुए इन्हें सम्मानित किया गया है। नोबेल कमेटी ने कहा है कि इन दोनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है, क्योंकि बोलने की आजादी ही लोकतंत्र और स्थायी शांति की पहली शर्त है।

मारिया रेसा न्यूज साइट रैप्लर की को-फाउंडर हैं। उन्होंने 2012 में इसकी स्थापना की थी। रेसा ने अपने देश में सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही के खिलाफ अभिव्यक्ति की आजादी के लिए आवाज उठाई थी। वहीं दिमित्री मुरातोव भी एक पत्रकार हैं। उन्होंने रूस में नोवाजा गजेटा नाम के न्यूज पेपर की शुरुआत की थी। वो देश में फ्रीडम ऑफ स्पीच की रक्षा के लिए सालों से काम कर रहे हैं। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में लोगों की आवाज उठाई थी।

2014 में शांति का नोबेल पुरस्कार बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को दिया गया था। सत्यार्थी शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाले दूसरे भारतीय थे। इससे पहले मदर टेरेसा को ये पुरस्कार मिला था। वहीं पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई सबसे कम उम्र में ये अवॉर्ड पाने वाली लड़की हैं।

इस साल नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की शुरुआत 4 अक्टूबर को ‘चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार’ के साथ हुई। 5 अक्टूबर को भौतिकी, 6 अक्टूबर को रसायन शास्त्र और 7 अक्टूबर को साहित्य का नोबेल दिया गया। 11 अक्टूबर को अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा होगी।

इससे पहले गुरुवार को साहित्य का नोबेल पुरस्कार तंजानिया के उपन्यासकार अब्दुलरजाक गुर्नाह को दिया गया है। नोबेल कमेटी ने अपने बयान में कहा- उपनिवेशवाद के खिलाफ रजाक ने किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने इस बुराई की जड़ पर अपने साहित्य के जरिए प्रहार किया। गुर्नाह की कोशिश है कि महाद्वीपों के बीच सांस्कृतिक अंतर की गहरी खाई को लेखनी के जरिए भरा जाए।

6 अक्टूबर को जर्मनी के बेंजामिन लिस्ट और अमेरिका के डेविड मैकमिलन को 2021 का केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार मिला है। एसिमेट्रिक ऑर्गेनकैटालिसस पर रिसर्च के लिए इन्हें यह सम्मान दिया गया है। उन्होंने मॉलिक्यूल्स बनाने वाले टूल का निर्माण किया है।

5 अक्टूबर को 3 वैज्ञानिकों को फिजिक्स के नोबेल प्राइज दिया गया है। इनका नाम स्यूकुरो मानेबे, क्लॉस हैसलमैन और जियोर्जियो पेरिसिक है। इसमें स्यूकुरो मानेबे और क्लॉस हैसलमैन ने पृथ्वी में जलवायु का फिजिकल मॉडल तैयार किया। इससे तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन पर नजर रखी जा सकती है। वहीं, जियोर्जियो पेरिसिक ने अणुओं से ग्रहों तक फिजिकल सिस्टम में होने वाले बदलाव को दिखाया।

4 अक्टूबर को अमेरिका के डेविड जूलियस और आर्डम पाटापोशियन को चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार तापमान और स्पर्श को महसूस करने वाले रिसेप्टर्स की खोज के लिए मिला। आर्डम पाटापोशियन स्क्रिप्स रिसर्च, कैलिफोर्निया में प्रोफेसर हैं।

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