उस समय लोगों को बचाना ही बड़ी चुनौती थी : पुलिस अधीक्षक विजय खत्री


 Satyakam News | 20/08/2021 3:46 PM


मुरैना/श्रीगोपाल गुप्ता। मप्र की राजधानी भोपाल के उत्तर  भोपाल जिले के पुलिस अधीक्षक विजय खत्री ने लेखक के साथ हुई एक मुलाकात में बताया कि कोरोना काल के पीक टाईम में हालात काफी खराब और भयावह हो गए थे। जिसमें पुलिस सहित पूरे प्रशासन और सरकार की एकमात्र प्रार्थमिकता थी कि कोरोना की चपेट में आये प्रत्येक मरीज को सकुशल ठीक कर उसके घर पहुंचाया जाये। हालांकि इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली मगर दुर्भाग्य से काफी जानों की छत्ति भी हुई ,जिन्हे काफी प्रयासों के बाद भी बचाया नहीं जा सका। कोरोना काल को सबसे खराब और भयावह अनुभव बताते हुए श्री खत्री जो भारतीय पुलिस सेवा के सन् 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, ने बताया कि पहली लहर के दौरान उनकी तैनाती प्रदेश के सबसे बड़े कोरोना हाॅटस्पाट इंदौंर में जून 2020 में हुई थी। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के कोरोना उपचार के सारे बड़े अरविंदो,एमबाय सुपर स्पेशियल्टी बोम्बे, मेदान्ता अपोलो अस्पताल मेरे ही क्षेत्र अंतगर्त आते थे। तब वहां बहुत ही दयनीय और भयावह स्थिति थी पुलिस को कानून बनाये रखना और लाॅकडाउन का मुस्तैदी से पालन कराने की अहम जिम्मेदारी तय करनी थी। हालात इतने असामान्य हो चले थे कि कई  जगह पुलिस पर ही हमले होने लगे मगर उस स्थिति में ज्यादा शक्ति का प्रयोग भी नहीं कर सकते थे।  लेकिन सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में जनता के सहयोग से स्थिति को संभाल लिया गया। 

इसी बीच इंदौर में जब कोरोना की रफ्तार थम सी गई तो उनका स्थांतरण प्रदेश की राजधानी भोपाल के उत्तर भोपाल जिले में जनवरी 2021में हो गया। उन्होने बताया कि वे ठीक से इस जिले को समझते कि इससे पहले ही  कोरोना की दूसरी लहर मार्च में तबाही कर मंजर लेकर आ गई। भोपाल में भी लगभग कोरोना के उपचार के लिए सभी बड़े सरकारी और गैर सरकारी  हमिदिया,चिरायु,पिपुल्स,आदि अस्पताल उत्तर भोपाल जिले के अन्तर्गत मेरे ही क्षेत्र में आते हैं। कोरोना की दूसरी लहर के खौफ के कारण अब पुलिस की प्रार्थमिकता में कानून बनाये रखना और लाॅकडाउन का मुस्तैदी से पालन कराने के साथ-साथ रेमिडिसीवर इजैंक्सन और जरुरी दवाओं का इंतजाम करना भी शामिल हो गया था। सबसे बड़ी चिंता प्रशासन के साथ-साथ हमारी भी हो गई कि किसी भी कीमत पर ऑक्सीजन की उपलब्धता की चैन न टूटे और इसकी सप्लाई निरंतर बनी रहे। इसके लिये पुलिस को रात-रातभर सरकारी व निजी अस्पतालों में दौड़-दौड़कर ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी पड़ती थी। इसके साथ ही अपने परिजनों को तड़फते देख उसके रोते हुए परिजनों की हालत देखकर अस्पताल से नदारत डाॅक्टरों को कई मर्तबा उनके से घर से लाना पड़ा क्योंकि कई अस्पतालों में परिजनों द्वारा हंगामा खड़ा कर देने से चिकित्सक अस्पतालों में आने के लिये तैयार नहीं थे। पुलिस प्रशासन और सरकार के लिए उस समय कोरोना के दंश से लोंगो को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बहरहाल राजाधानी में मौजूद आला अधिकारी और सरकार के तमाम सुप्रयासों से आखिरकार सफलता मिली और बहरहाल एक बार फिर कोरोना की रफ्तार की लगाम कस गई।  मगर पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट करते हुए कहा की लगाम कस जरुर गई मगर कोरोना से निजात नहीं मिली है। उन्होने जनता से अपील की है कि तीसरी लहर की चेतावनी को पूरी गंभीरता से लेते हुए मास्क,दो गज की दूरी और लगातार समय-समय पर साबून से हाथ धोते रहिए। 

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