सॉरी। हम आपको नहीं बचा सकते ! हम सिर्फ नियम...


 Satyakam News | 21/05/2021 10:12 PM


- तमाम ना नुकर और एक नहीं कई नियम बनाने बदलने के बावजूद शिवपुरी में अकाल मौत का सबसे बड़ा ठीया बना मेडीकल कॉलेज

- मौत का हॉट स्पॉट बने मेडीकल कॉलेज पर विशेष/ केपी परिहार

शिवपुरी। जब किसी भी चिकित्सालय में उपचाररत किसी मरीज की मौत हो जाती हैं तो चिकित्सक मरीज की मौत की सूचना निम्न शब्दों में देता हैं सॉरी नो मोर। हिन्दी में हम मरीज को बचा नहीं सके। इस लाईन में डॉक्टर की यह पीढ़ा भी छुपी रहती हैं कि हम जितना प्रयास कर सकते थे। किए लेकिन जिंदगी बचा नहीं सके। सॉरी... के बाद मरीज के परिजन मातम मनाने लगते हैं उपरोक्त इसलिए प्रासंगिक हैं कि क्योंकि कोरोना शिवपुरी में मौत की महामारी बन गया। क्यों? कौन इसके लिए जिम्मेदार हैं! क्या शिवपुरी में कोरोना को मौत की महामारी बनने से रोका जा सकता था? जवाब निम्न हैं। कोरोना मौत की महामारी बना आरोपित तौर पर मेडीकल कॉलेज की लचर स्वास्थ्य सेवाओं और यहां के डीन की अक्षमताओं की बजह से। नतीजन स्वास्थ्य सेवाओं के इतिहास में सबसे बड़ी कालिख का प्रमाण निम्न लाईन में बयां किया जा रहा हैं। यहां जो भी भर्ती हुआ उसे अप्रत्यक्ष तौर पर यहां गहरे में फैले मौत के सन्नाटे से निम्न लिखित सुनाई दिया। सॉरी! हम आपको नहीं बचा सकते। इस प्राणघातक आवाज की गूंज मेडीकल कॉलेज में भर्र्ती मरीजों ने ही नहीं सुनी, मौत ने भी इसे आमंत्रण के तौर पर सुना और मेडीकल कॉलेज में आखरी सांस लेने वाली कई जिंदगियां शमशान घाट में कई कतारों में चिता बनकर जल गई। कब्रिस्थान में गढ़ गई। मेडीकल कॉलेज में लगातार हो रही मौतों ने कॉलेज प्रबंधन और यहां की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरी काली कालिख पोत डाली नतीजन डीन को मेडीकल कॉलेज साख याद आई और देखते ही देखते साख बनाने के लिए कई नए नियम बना डाले और कई पुराने नियम तोड़ डाले। नजीर देखिए: मेडीकल कॉलेज में सीधे मरीज भर्ती नहीं होंगे। वहीं मरीज भर्ती होंगे जो जिला चिकित्सालय से रिफर होंगे। नियम यह भी था कि मेडीकल कॉलेज में मरीजों को आईशोलेट किया जाएगा। इन नियमों को उस साख के लिए जो कभी थी ही नहीं के लिए ठेंगा दिखाया गया बढ़ते मौतों के आंकड़े और मौत के अड्डे के लिए बदनाम मेडीकल कॉलेज ने अपनी साख के लिए पुराने नियमों को तोड़कर नए नियम बनाए। आदेश आया अब कोरोना के मरीज जहां उपचाररत हैं वे वहीं पूर्ण उपचार करायें! गंभीर मरीजों को मेडीकल कॉलेज रिफर न किया जाए। इस नियम के पीछे सोच क्या हैं? सीधी सपाट सोच यह हैं कि गंभीर मरीज यहां न आए। तो गंभीर मरीज अगर मेडीकल कॉलेज नहीं आयेंगे तो क्या उल्टी, दस्त और मौसमी बुखार के मरीजों के लिए मेडीकल कॉलेज पर जनता के करोडों रूपए की धनखर्ची की गई हैं।  यहां जो नीचे से ऊपर तक का स्टाफ हैं उसके स्थापना व्यय (वेतन) पर लाखों की धनखर्ची उपरोक्त कैटेगिरी के मरीजों के नाम पर क्या उचित हैं? यहां जो डीन हैं आप उसके प्रचारित बयानों ( अखबारों में छपे) में उनका बौद्धिक देखिए पहले के जो नियम उन्होंने बनाए थे वह तोड़ दिए, पलट दिए नए नियम बना लिए जो नए नियम बने हैं उनसे मेडीकल कॉलेज की साख क्या होगी? उन्होंने कहा मेडीकल कॉलेज में लगातार मौतें हो रही हैं। जिससे कॉलेज की साख खराब हो रही हैं। उन्हें कोई बतायें कि फर्जी भर्ती, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और एक नहीं कई झोल झाल से मेडीकल कॉलेज पहले से ही कुख्यात हैं। रही सही कसर आप यह कहकर पूरी कर रहे हैं कि अब मेडीकल कॉलेज में बिना सिफारिस के भी बेड मिलेंगे। यह कह कर आपने बताया दिया कि मेडीकल कॉलेज में कल तक सिफारिस के बिना बेड आप नहीं दे रहे थे। आपका प्रबंधन सिर्फ हुक्म बजा रहा था। आपको शर्म आनी चाहिए जो आप सिफारिस तो सुन रहे थे लेकिन जिसे सच में जरूरत हैं जिसकी जिदंगी जीवन की जंग मौत से हार रही हैं आपने उसे क्या बैड दिया? आपने मरीज-मरीज में फर्क क्यों किया? धिक्कार हैं स्वास्थ्य सेवाओं में आने से पहले आपके द्वारा ली गई उस शपथ पर जिसमें...! आप में अगर मानवता होती और सेवा के प्रति आप समर्पित होते तो मेडीकल कॉलेज के ऊपर मौत का ठिया होने का ठप्पा नहीं लगता। जनमत सुन लो जो मेडीकल कॉलेज से होकर आया हैं उसने यही कहा है मेरी किस्मत अच्छी हैं जो बच गया बरना वहां तो मौत का ताण्डव हो रहा हैं और उसके दूत बने हैं....।

Follow Us