पुलिस लूट कराती है और आधा-आधा खाती है....


 Satyakam News | 13/07/2021 10:43 PM


आज से एक दशक पूर्व जब भी  चंबल संभाग मुख्यालय मुरैना में कोई लूट डकैती जैसी बड़ी बारदात हो जाती थी तो अवाम सड़क पर उतर कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो जाता था! इस अवाम का पुलिस की कथित व संदिग्ध  कार्य प्रणाली व निसक्रियता के खिलाफ सबसे लोकप्रिय नारा होता था कि "पुलिस लूट कराती है और आधा-आधा खाती है!हालांकि काफी वर्षों से कुछ पुलिस की सक्रियता व परिस्थिति बस इस नारे को लगाने का अवसर जनता को प्राप्त नहीं हुआ है! मगर गत दिवश घटी एक घटना ने पुलिस के द्वारा खुलेआम आरोपियों की मदद करने की नीयत ने पुनः एक दफा इस नारे को यकायक जिंदा कर खड़ा कर दिया है!मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित चम्बल नदी से रेत के अवैध उत्खनन व उपयोग को लेकर है!दरअसल प्रतिदिन चम्बल नदी की गोद को छलनी कर करोड़ों रुपयों का अवैध रेत उत्खनन करने वाले खूंखार माफियाओं में भय का पर्याय बनी वन विभाग की देवरी घड़ियाल की अधीक्षिका श्रद्धा पंढरे ने गत शुक्रवार को सिटी कोतवाली मुरैना के ठीक पीछे बन रहे महिला थाने के परिसर में अपनी टीम के साथ छापा मारा! वहां उन्होने देखा कि थाने की बिल्डिंग को बनाने में चम्बल के प्रतिबंधित रेत का उपयोग हो रहा है! इस पर उन्होने थाना परिसर में पड़े 12 मैट्रिक टन रेत को जप्त कर इसे वहां काम कर रहे लेबर ठेकेदार बलवीर सिंह कुशवाह की सुपर्दी में देकर थाना सिटी कोतविली में ठेकेदार बलवीर सिंह  पुलिस हाउसिंग काॅर्पोरेशन के उपयंत्री निर्भय पाल व एसडीओ बृजेश जाटव के खिलाफ मामला दर्ज करने का आवेदन दे दिया। 

चूकि मौके पर थाना सिटी कोतवाली प्रभारी भी उपस्थित थे और उनके समक्ष ही ठेकेदार की सुपुर्दी में रेत दिया गया!चंबल इतिहास में पहली दफा हुआ कि एक अधिकारी ने उक्त कार्यवाही कर पुलिस के गिरेबां पर हाथ डाल दिया? मगर दो दिन बाद सूचना पर आधीक्षिका मोके पर टीम के साथ पहुंची तो चम्बल का रेत चोरी हो चुका था और उसकी जगह सिंध नदी का रेत ढलवा दिया गया जिसका उत्खनन वैध है!इतना ही नहीं जिस ठेकेदार उपयंत्री व एसडीओ के खिलाफ श्रद्धा पंढरे ने पुलिस में आवेदन दिया था ,उन तीनों ने पंढरे द्वारा वेवजह परेशान करने व रिश्वत मांगने का एक आवेदन उनही नगर निरीक्षक को सुपुर्द कर जिनके समक्ष चम्बल का रेत जप्त किया गया था!लेकिन जब पंढरे ने सिटी थाने के कोतवाल से रेत के चोरी के सन्दर्भ में पूछा तो उनका कहना था कि उन्हे नहीं मालूम की रेत चोरी भी हुआ या नही? वे कोई रेत की रखवाली के लिये थोड़े ही हैं! बहरहाल मोके पर 12 में से बचे रह गए 2 मैट्रिक टन चम्बल के रेत को जप्त कर अधीक्षिका ने वन विभाग की सुपुर्दगी में दे दिया! हालांकि दर्जनों लोगों पर चम्बल का प्रतिबंधित रेत उपयोग करने पर तत्काल एफ आई आर दर्ज करने वाला पुलिस विभाग खुद पर अभी तक एफ आई आर दर्ज नहीं कर सका! ऐसे में सवाल उठता है कि अत्यंत सुरक्षित थाना परिसर में रखा रेत चोरी हो सकता है? तो शहर या जिले की कोई जगह महफूज नही हो सकती जहां चोरी की वारदात नहीं हो सके!इतना तो तय था कि पंढरे ने यह कार्यवाही कर पुलिस रुपी शेर के मूंह में हाथ डाल दिया है! मगर अपनी कार्यप्रणाली से अवैध रेत व पत्थर खनन माफिया व संरक्षण देने वाले नेताओं के निशाने पर रहने वाली पंढरे अब पुलिस के भी निशाने पर आ खड़ी हो गई हैं! आरोपीयों द्वारा दिया गया आवेदन और पुलिस द्वारा तत्काल स्वीकार कर लेना तो यही दर्शता है ! बहरहाल पुलिस की आरोपियों के प्रति हमदर्दी व मिलीभगत तो यही कहानी कहती है कि पुलिस लूट कराती है और आधा-आधा खाती है। 

श्रीगोपाल गुप्ता

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