"कुछ कही कुछ अनकही"


 Satyakam News | 12/07/2021 3:40 PM


श्रध्दा पांढरे ने शेर के मूंह में हाथ डाला
चंबल के बीहड़ों में इन दिनों बेखौफ और अत्याधिक खूंखार व आदमखोर रेत पत्थर माफिया सबसे ज्यादा दहशत में है! ऐसा बीते 3 दशकों में पहली दफा है कि आदमखोर हो चले रेत व पत्थर माफिया थर-थर कांपने के लिए मजबूर है और उसकी ये मजबूरी उसके साथ तीन दशक से भी ज्यादा समय से चंबलांचल में  चोर-सिपाही का खेल खेल रही किसी पुलिस या पुलिस के किसी दंबग अधिकारी की वजह से नहीं है! मजे की बात तो यह है कि अवैध रेत व पत्थरों के खनन पर अंकूश लगाने में बुरी तरह असफल रही पुलिस,प्रशासन व सफेदपोश नेता खुद भी दहशत में है! इन लोगों के दहशत में रहने की वजह बनी है वन विभाग देवरी घड़ियाल की अधीक्षिका श्रध्दा पांडरे! जिन्होने हजारों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के मान से चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन और बेहड़ों में से पत्थर खनन करने वाले माफियाओं की मात्र चार महिने में ही जिले में अपनी तैनाती के उपरांत कमर तोड़कर रख दी! इसी कारण वे माफियाओं के साथ-साथ उनको पालने वाले राजनितिज्ञों व पुलिस प्रशासन के निशाने पर आ गई हैं! गत दिवश तो उन्होने बड़ा कारनामा कर सीधे पुलिस प्रशासन को लपेट दिया! हुआ यूं कि उन्हे सूचना मिली की कि सिटी कोतवाली के पीछे बन रहे महिला थाने की बिल्डिंग में चंबल का रेत इस्तेमाल हो रहा है! बस फिर क्या था उन्होने अपने सीमित अमले के साथ छापा मारकर वहां डंप 30 घनमीटर चंबल का रेत जप्त कर ठेकेदार व शासकीय इंजीनियर को आरोपी बनाते हुये एफ आई आर दर्ज करने का आवेदन पुलिस को दिया साथ में ही बड़ोखर स्थित इंदिरा सरोवर के निर्माण में भी चंबल का रेत इस्तेमाल करने पर यहां भी पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कार्यवाही की है।

ऐसा पहली दफा है कि चंबल का रेत इस्तेमाल करने पर सीधे पुलिस प्रशासन के खिलाफ कार्यवाही कर टकराव मोल ले लिया है!अब से पहले पुलिस ने शहर के दर्जनों अपना भवन बनाने लोगों को चंबल का रेत इस्तेमाल पर आरोपी बनाया था मगर खुद को अलग रखा! माना जाता है कि चार महिनों में माफियाओं द्वारा एक दर्जन हमले झेलने वाली निडर श्रद्धा पांढरे ने सीधे शेर (पुलिस प्रशासन) के मूंह में हाथ डाल दिया है।

सिस्टम डेपलव करना होगा

भारतीय नौसेना ने कोच्ची में एक आदेश जारी कर नौसेना अड्डों व संपत्तियों के 3 किमी के दायरे में ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी है! यह फैसला जम्मू में वायुसेना अड्डे पर ड्रोन हमले को देखते हुए लिया है!अब सैन्य अड्डों के आसपास ड्रोन उड़ाने कड़ी कार्यवाही होगी,क्योंकि अब राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने के आरोपों में मुकदमा दर्ज होगा!
इस फैसले से अब ये सवाल खड़ा होता है कि इस आदेश से क्या ड्रोन हमले या उड़ान पर रोक लग जायेगी? सरकार और नौसेना को सोचना होगा कि देश में कहीं भी किसी प्रदेश में चुनावों के दौरान हथियारों को थानों में जमा करवा लिया जाता है!बावजूद इसके चुनाव में हथियारों का खुलकर उपयोग होता है और कभी-कभी तो दर्जनों लोग मौत के मूंह में समा जाते हैं, ऐसा क्यों? क्योंकि रोक या जमा वैध हथियार होते हैं अवैध हथियारों पर कोई रोक या प्रतिबंध नही लग सकता! उसी तरह जो लोग अपने देश से प्यार और जी जान से चाहते हैं वे नौसेनाओं या अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास ड्रोन क्यों उड़ायेंगे! ये काम सिर्फ आंतकवादी ही कर सकते हैं और जम्मू वायुसेना अड्डे पर ड्रोन हमलों में भी  प्रथम दृष्टा आंतकवादियों के हाथ होने के ही सबूत मिले हैं! सरकार को चाहिये कि भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुके ड्रोन हमलों को रोकने के लिये सिस्टम विकसित करे क्योंकि राफेल और परमाणु व अन्य हथियार ड्रोन हमलों को नहीं रोक सकते।

और अब अंत में जब मेढ़ ही खेत को चरने लगे

मुरैना जिले में ठीक खरीफ की फसल की बोबनी से पहले ही न केवल खुले बाजार में बल्कि सरकारी गोदामों में भी अमानक खाद के भंडार पाए गए! कृषि विभाग के उपसंचालक पीसी पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ पोरसा का सरकारी गोदाम में रखा लाॅट क्रमांक 103/38 तथा डीएमओ गोदाम मुरैना के लाॅट नंबर 8/20 के उर्वरक सैंपल जांच में अमानक पाए गए हैं! इसी के एक निजी फर्म मै.जयगुरुदेव बीज भंडार कैलारस के खाद का सैंपल अमानक पाया गया! ऐसे में सवाल पैदा होता है कि निजी फर्म के मालिकगण तो लाश के ऊपर से कफन भी नोच लेते हैं! ऐसा होते कोरोना महामारी में देश ने अक्सर होते देखा कि कैसे निजी अस्पताल और मेडिकल संचालकों ने मरीजों को नोच- नोचकर जिंदा ही मार दिया और उनकी लाशों को कुत्तों के खाने के लिये सड़क पर फैंक दिया था!मगर छोटे-छोटे और सींमात किसानों की बेहतरी के लिए बनी सहकारी सोसायटी ही अमानक खाद व बीज बेचकर उनकी बोटियां नोचने लगें तो फिर क्या कहा जा सकता है? यहां तो जिस मेढ़ पर खेत की रखवाली का जिम्मा है वही फसल को चर रही है।

श्रीगोपाल गुप्ता

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